लूट का जरिया हैं स्पैम मेल्स

>> Thursday, April 24, 2008

ई-बॉक्स में आ रही ज्यादातर ई-मेल्स में स्पैम होता है। स्पैम से बिजनेस करने वालों की होड़ मची है, जिसमें एशियन कंट्रीज अब पीछे नहीं हैं। कैसे ई-मेल्स में आने वाला स्पैम खतरनाक साबित हो सकता है।
ई-मेल के जरिए पैसा कमाना अब कंप्यूटर प्रोफैशनल्स के बाएं हाथ का खेल है। दिनरात कंप्यूटर से जूझने वालों ने पैसा कमाने का आसान रास्ता स्पैम को बनाया है। हाल ही में एक निजी कंपनी को जी-मेल के जरिए स्पैम ई-मेल भेजी गई। जी-मेल का नाम देखते हुए इस ई-मेल पर विश्वास करके कंपनी के ऑनर ने सब डीटेल्स दे डालीं और जब तक उन्हें कुछ पता चल पाता तो बहुत देर हो चुकी थी। यह किस्से दुनिया भर में बढ़ रहे हैं।
ज्यादातर ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले यूजर्स भी स्पैमर्स का बिजनेस बढ़ा रहे हैं। कंप्यूटर प्रोफैशनल्स के मुताबिक इसीलिए अब यूजर्स को खुद ही अलर्ट होकर क्लिक करने की जरूरत है।
92.3 यह कोई एफएम फ्रिक्वैंसी नहीं बल्कि वो आंकड़ा है, जो स्पैमर्स की सक्सैस रेट बताता है। इस वक्त इन बॉक्स में आ रही 92.3 प्रतिशत मेल्स स्पैम होती हैं। हाल ही में सोफो कंपनी ने अपनी बाई-एनुअल रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक यूएस दुनिया भर में सबसे ज्यादा स्पैम फैला रहा है। 15.4 प्रतिशत स्पैम यूएस द्वारा भेजी जाती हैं, वहीं रशिया 7.4 प्रतिशत स्पैम के लिए जिम्मेदार है। इस दौड़ में अगर कांटीनेंट्स की बात की जाए तो एशिया के स्पैमर्स 34.3 प्रतिशत स्पैम इन बॉक्स में भेज रहे हैं, वहीं यूरोप 30.7 प्रतिशत और नार्थ अमेरीका 18.9 प्रतिशत से इस खेल में शामिल है।
स्पैम भेजकर जहां एक तरफ शरारती दिमाग पैसे कमा रहे हैं, वहीं ये यूजर्स के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। इन-बॉक्स में आने वाली कई मेल्स फेक होती हैं और साथ ही उनमें स्पैम होता है, जो कंप्यूटर और डाटा दोनों को नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए ई-मेल सर्विस देने वाली वैबसाइट्स को सिक्योरिटी बढ़ाने की जरूरत है।
हालांकि स्पैम की रिपोर्ट करने के लिए हर ई-मेल सर्विस प्रोवाइडर रिपोर्ट एस स्पैम की ऑप्शन देता है, लेकिन फिर भी स्पैमर्स इनसे बचते हुए अपना काम कर रहे हैं। ज्यादातर स्पैम में याहू, जी-मेल और रैडिफमेल जैसे डोमेन नाम का होने के कारण यूजर्स इन्हें इग्नॉर नहीं कर पाते हैं।
ई-मेल ग्रुप्स के साथ सबसक्राइब करने वाले यूजर्स को भी स्पैम का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा ज्यादातर स्पैम कैनेडियन फारमेसी, लॉटरी, विन ए ट्रिप, सॉफ्टवेयर इंफॉरमेशन के नाम से भी भेजे जाते हैं। यह सब भी विदेशों में लूटा का जल बने हुए हैं, जो हर दिन नए शिकार फंसाते हैं।
जिन ई-मेल को रिपोर्ट ऐसे स्पैम करते हैं वो स्पैम फोल्डर में जाती है। यूजर्स को किसी भी अंजान ई-मेल आईडी से आई ई-मेल पर विश्वास नहीं करना चाहिए। स्पैम से भी कंप्यूटर में वायरस आ सकता है।

1 comments:

राज भाटिय़ा April 24, 2008 at 11:34 PM  

खोलो मत एक दम से मिटा दो, मे जिसे नही जानता वो e mail कभी नही खोलता,